Marriage Certificate Apply 2026: विवाह प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कैसे करें, जानें इसके लाभ, पात्रता एवं कहां-कहां पड़ती है आवश्यकता

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Marriage Certificate Apply 2026: हेलो दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे समाज में और भारतीय संस्कृति में विवाह को एक बहुत ही पवित्र और एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है पुराने समय से ही विवाह से जुड़ी कई सारी परंपराए एवं रीति रिवाज चलते चले आ रहे हैं। लेकिन आज के इस बदलते दौर और कानूनी ढांचे के विकास के साथ अब विवाह करना केवल धार्मिक या सामाजिक रूप से ही पर्याप्त नहीं है बल्कि आज के समय में विवाह को एक कानूनी मान्यता दिलाना बहुत जरूरी हो गया है और यहीं पर सवाल आता है मैरिज सर्टिफिकेट ( विवाह प्रमाण पत्र ) का जो की एक महत्वपूर्ण रोल अदा करता है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 14 फरवरी वर्ष 2006 के (सीमा बनाम अश्विनी कुमार ) मामले के ऐतिहासिक फैसले के बाद से भारत में होने वाले सभी विवाहों को कानूनी तौर पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। फिर चाहे वह विवाह किसी भी धर्म या किसी भी जाति में ही क्यों नहीं हो। विवाह पंजीकरण न सिर्फ पति पत्नी के अधिकारों की रक्षा करता है बल्कि भविष्य में आने वाली कई कानूनी और प्रशासनिक समस्याओं को भी दूर करता है। एक दौर ऐसा हुआ करता था कि जब लोग Marriage Certificate ( विवाह प्रमाण पत्र ) को एक फ़िजूल काम या फिर मुश्किल भरा काम मानते थे लेकिन आज की इस डिजिटलिकरण प्रक्रिया में यह काम बेहद आसान बना दिया है।

आज हम आप सभी के साथ इस आर्टिकल के माध्यम से Marriage Certificate से जुड़ी हर एक छोटी से बड़ी जानकारी साझा करेंगे और यहां हम यह बताने की कोशिश करेंगे की विवाह प्रमाण पत्र के क्या-क्या लाभ है इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होते हैं और कौन-कौन पात्र है और विवाह प्रमाण पत्र हमारे कौन-कौन से जरूरी दस्तावेज बनने में काम आता है। हमारा मकसद यह है कि हम आपको एक ही जगह पर बिल्कुल सही और स्पष्ट जानकारी से अवगत कराएं ताकि आपको अपना मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) क्या होता है?

विवाह प्रमाण पत्र ( Marriage Certificate) एक सरकारी और कानूनी अधिकारिक दस्तावेज होता है जो यह प्रमाणित करता है कि( दो व्यक्तियों पति और पत्नी ) की शादी कानूनी रूप से पूरी हुई है। विवाह प्रमाण पत्र विवाहित जोड़े का वैवाहिक रूप से सबूत होता है। हमारे देश में विवाह का पंजीकरण मुख्य रूप से दो अधिनियम के तहत किया जाता है।

  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955- ( Hindu Marriage Act 1955 ) यदि दो व्यक्तियों (पति और पत्नी) का विवाह होता है और वह हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध आदि धर्म से बिलॉन्ग करते हैं तो उनका विवाह का मंजीकरण हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत किया जाता है।
  • विशेष विवाह अधिनियम 1954- ( Special Marriage Act 1954) यदि दो व्यक्तियों (पति और पत्नी) कहां विवाह होता है और भी अलग-अलग धर्म से बिलॉन्ग करते हैं या फिर धार्मिक रीति रिवाज से हटकर कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं तो उनका विवाह इस विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत पंजीकृत किया जाता है।

यह दोनों प्रमाण पत्र राज्य सरकार के संबंधित विभाग राजस्व विभाग या फिर नगर निगम द्वारा जारी किए जाते हैं और यह इस बात का सबूत होते है कि दोनों का विवाह कानूनी तौर पर संपन्न हुआ है।

विवाह प्रमाण पत्र [Marriage Certificate] बनवाने के फायदे

  • कानूनी मान्यता एवं सुरक्षा प्रदान करना- यह प्रमाण पत्र विवाह को कानूनी रूप से वैध बनता है और खासकर महिलाओं की सुरक्षा जैसे- (तलाक, गुजारा भत्ता, भरण पोषण, बच्चों की कस्टडी, संपत्ति में अधिकार) आदि के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।
  • नाम बदलना- विवाह प्रमाण पत्र शादी के बाद महिला का उपनाम ( surname) आदि बदलने में काम आता है।
  • पासपोर्ट और वीजा अप्लाई करने के लिए- यदि अगर आप अपना नया पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि स्पाउस वीज़ा प्राप्त करने के लिए एंबेसी आपसे आपका विवाह प्रमाण पत्र जरूर मांगती है।
  • जॉइंट बैंक खाता करवाते समय – यदि पति और पत्नी किसी भी मामले में अपना जॉइंट बैंक अकाउंट खुलवाना चाहते हैं तो बैंक में सबसे पहले उनका विवाह प्रमाण पत्र ही मांगा जाता है।
  • बीमा पॉलिसी और नॉमिनी में आवश्यक-बीमा पॉलिसी में बैंक खाता पति-पत्नी को नॉमिनी बनाने के लिए या क्लेम प्राप्त करने के लिए विवाह प्रमाण पत्र एक जरूरी दस्तावेज माना जाता है।
  • विरासत और उत्तराधिकार- यदि जीवन साथी की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण होने के मामले में संपत्ति का हस्तांतरण करते समय और उत्तराधिकार का दावा करने पर विवाह प्रमाण पत्र को एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।

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Marriage Certificate किन-किन मामलों में काम आता है?

उपयोगविवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता
वित्तीय लाभ जॉइंट खाता, होम लोन, या सरकारी योजना /पॉलिसी का लाभ लेने के लिए
अंतर्राष्ट्रीय यात्रा (वीजा ) विवाह प्रमाण पत्र पति पत्नी के लिए आश्रित वीजा ( Depending Visa )प्राप्त करने के लिए अनिवार्य होता है
सरकारी दस्तावेजों में बदलाव के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि में नाम एड्रेस बदलने के लिए
कानूनी विवाद होने पर पति-पत्नी के बीच कोई कानूनी विवाह जैसे तलाक, बच्चों की कस्टडी आदि के मामले में विवाह को सिद्ध करते समय विवाह प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।

Marriage Certificate बनवाने के लिए पात्रता एवं मानदंड

  • आयु सीमा ( Age Limit )– विवाह करते समय लड़के (पति) की आयु कम से कम 21 वर्ष और लड़की (पत्नी) की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • दोनों पक्षों की रजामंदी – यह विवाह दोनों पक्षों की पूर्ण स्वतंत्रता सहमति से संपन्न हुआ होना चाहिए किसी भी प्रकार का दबाव या जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
  • दूसरा (पूर्व ) विवाह की स्थिति– विवाह के समय किसी भी पक्ष का पति या पत्नी जीवित नहीं होना चाहिए यानी कि ( दूसरा विवाह या बहुविवाह ) कानूनी तौर पर मान्य नहीं है यदि किसी व्यक्ति का दूसरा विवाह होता है तो पहले पति या पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र या तलाक प्रमाण पत्र होना जरूरी है।
  • मानसिक रूप से स्वस्थ होना ज़रूरी – विवाह के समय दोनों पक्षों का मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है किसी ऐसे मानसिक बिकार व्यक्तियों का विवाह नहीं होना चाहिए जो उन्हें विवाह की सहमति देने में अयोग्य बनाते हैं।
  • निषिद्ध रिश्ता ( खून का रिश्ता )- दोनों पक्ष किसी भी प्रकार से निषिद्ध रिश्ते या रक्त संबंध रिश्ते जैसे – ( सगे भाई बहन, चाचा भतीजी ) आदि में नहीं होने चाहिए जब तक कि उनके समुदाय उनका समाज और परिवार उन्हें ऐसा करने की अनुमति न देता हो।

Marriage Certificate बनवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • पहचान प्रमाण पत्र- आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि।
  • आयु प्रमाण पत्र- पति और पत्नी का जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं कक्षा की मार्कशीट, पासपोर्ट, पैन कार्ड आदि।
  • पति का प्रमाण – राशन कार्ड, बिजली का बिल, पानी का बिल, पासपोर्ट ( कम से कम एक व्यक्ति का पता उस क्षेत्र का होना जरूरी है जहां से मैरिज सर्टिफिकेट अप्लाई किया जा रहा है)
  • विवाह का प्रमाण – शादी का कार्ड पति-पत्नी की साफ सुथरी दो फोटो जिसमें वरमाला या फेरे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
  • शपथ पत्र- पति और पत्नी द्वारा अलग-अलग नोटरीकृत शपथ पत्र जिसमें विवाह की स्थिति, विवाह का स्थान, विवाह की तारीख, एवं ( अविवाहित स्थिति में तलाकशुदा, विधवा ) आदि उल्लेख और स्पष्ट हो।
  • गवाहों के दस्तावेज – विवाह प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान दो-तीन गवाहो के दस्तावेज जैसे- आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो आदि की आवश्यकता होती है।

Marriage Certificate के लिए आवेदन प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

  • सबसे पहले अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट या ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाना होगा.
  • अब वेबसाइट पर न्यू यूजर रजिस्ट्रेशन या सिटिजन रजिस्ट्रेशन का विकल्प का चयन करें और अपना ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और अन्य बुन्यादी जानकारी दर्ज करके अपना अकाउंट बनाएं।
  • पोर्टल पर लोगिन करने के पश्चात सेवाओं की सूची में जाकर Apply For Marriage Certificate या Registration Of Marriage का विकल्प चुने।
  • अब आपके सामने आवेदन फॉर्म ओपन होगा जहां पर आपके पति-पत्नी का नाम उनकी जन्मतिथि विवाह का स्थान, विवाह की तारीख और गवाहों की जानकारी सावधानीपूर्वक भरनी होगी और यह ध्यान रहे कि आपके द्वारा भरी गई जानकारी आपकी दस्तावेजों से मेल खाती हो।
  • अब आवेदन फार्म में मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज को स्कैन करके अपलोड करें।
  • दस्तावेजों को सफलतापूर्वक अपलोड करने के पश्चात फीस का भुगतान ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से करें।
  • शुक्ल का भुगतान करने के पश्चात आपको अपने नजदीकी सब डिविजनल मजिस्ट्रेट ( SDM) या विवाह रजिस्टर कार्यालय में जाकर एक तारीफ और स्थान का चयन करना होगा।
  • अब निर्धारित तिथि पर पति और पत्नी को अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर उपस्थित होना होगा और वहां आपके दस्तावेजों को सत्यापित किया जाएगा और आपसे हस्ताक्षर लिए जाएंगे।

ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया

  • सबसे पहले अपने क्षेत्र के नगर निगम, ग्राम पंचायत, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट ( SDM ) या रजिस्ट्रार कार्यालय में जाए जहां आपका विवाह संपन्न हुआ हो।
  • कार्यालय में जाकर विवाह पंजीकरण का फार्म प्राप्त करें.
  • आवेदन फार्म में मांगी गई सभी जरूरी जानकारी भरे और पति-पत्नी के हस्ताक्षर करें।
  • आवेदन फार्म में मांगे के सभी जरूरी दस्तावेजों की फोटो कॉपी आवेदन फार्म के साथ अटैच करें।
  • अब भरे गए आवेदन फार्म को अधिकारी के पास जाकर जमा करें अधिकारी आपका फॉर्म की जांच करेगा और आपको एक (Acknowledgement Slip ) देगा और आपको ऑफिस आने की तिथि प्रदान करेगा।
  • अब दी गई तिथि पर पति-पत्नी और गवाहों को रजिस्ट्रार के सामने उपस्थित होना होगा और वहां शपथ लेने और हस्ताक्षर करने के पश्चात आपकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

Marriage Certificate के लिए लगने वाले फीस और समय सीमा

विवरण हिंदू विवाह अधिनियमविशेष विवाह अधिनियम
आवेदन शुल्क लगभग ₹100 से ₹500 तक लगभग ₹150 से ₹500 तक
देरी से पंजीकरण शुल्क लगभग ₹250 से ₹1000 तक लगभग ₹250 से ₹1000 तक
प्रमाण के पत्र जारी होने में लगने वाला समय 15 से 30 दिन 30 से 60 दिन तक( आपत्तियों के लिए 30 दिन का समय अनिवार्य है )
तत्काल सेवा कुछ राज्यों में एक से तीन दिन उपलब्ध नहीं है

FAQ

शादी के कितने दिनों बाद Marriage Certificate बनवाना चाहिए?

विवाह प्रमाण पत्र लगभग शादी के 7 से 30 दिनों के भीतर बनवा लेना चाहिए वरना जितना देरी करेंगे उतना ही अतिरिक्त शुल्क आपको देना पड़ेगा।

क्या विवाह प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी है?

जी हां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी विवाहित जोड़ों को अपना विवाह प्रमाण पत्र और विवाह पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।

मैरिज सर्टिफिकेट के लिए गवाह कौन-कौन बन सकता है?

वह व्यक्ति जिनकी आयु 18 वर्ष से ऊपर हो और जो आपके विवाह में मौजूद हों और उनके पास वैध पहचान पत्र आईडी प्रूफ हो वह विवाह के लिए गवाह बन सकते हैं।

क्या अलग-अलग धर्म के लोग भी विवाह प्रमाण पत्र बनवाने के पात्र हैं?

जी हां अगर दो अलग-अलग धर्म के व्यक्तियों ने विवाह किया है तो वह विशेष विवाह अधिनियम एक्ट 1954 के तहत अपना विवाह पंजीकृत करवा सकते हैं और मैरिज सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।

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